
फिल्म की कहानी
‘गहराइयां’ फिल्म में किरदारों के बहाने जीवन में रिश्तों की अहमियत और इसके समानंतर उलझनों को दिखाने की कोशिश की गई है। कहानी में जिंदगी में होने वाली कठिनाइयों के उतार चढ़ाव को बख़ूबी से दिखाया गया है जैसे की समुंद्र उठने वाली लहरों के साथ होता है। जिंदगी में जब किसी का साथ अच्छा लगता है लेकिन उसके उल्ट उसका साथ छोड़ना मन में एक बेचैनी पैदा करता है उसी प्रकार अलीशा (दीपिका पादुकोण) , जैन (सिद्धांत चतुर्वेदी) को एक-दूसरे का साथ तो अच्छा लगता है। लेकिन इस रिश्ते में धागे उलझे हुए हैं। इसमें एक-दूसरे के साथ होना एक सुकून भी है। जिसमें बेचैनी भी दर्द भी है और राहत भी।

फिल्म का रिव्यू
अलिशा (दीपिका पादुकोण) एक योग इंस्ट्रक्टर है। जैन एक रियल एस्टेट का hotshot है । पहली मुलाकात में ही दोनों आकर्षित होते हैं फिर दोनों समय के साथ इस रिश्ते की गहराइयों में गोते लगाते हैं। इस से हटकर उनकी एक अलग जिंदगी भी है, जिसकी सच्चाई को जानकार एक दूसरे को झटका लगता है। टिया (अनन्या पांडे), जो अलीशा की कजिन है जिसकी शादी जैन से होनी है। खुद अलिशा भी 6 साल से करण (धैय करवा) के साथ लिव-इन रिलेशन में है। अलिशा और जैन का रिश्ता अनसुलझी पहेली की तरह है। जिसकी राह फिसलन ही फिसलन है। तो क्या उनका रोमांस इस राह को पार पा सकेगा? फ़िल्म ‘गहराइयां’ आज के जमाने के रिश्तों की कहानी है।
डायरेक्टर शकुन बत्रा ने फ़िल्म ‘गहराइयां’ में रिश्तों में बेवफाई कब और क्यों होती है? इसके पीछे के कारणों को कहानी में उतारा है इस प्रकार के की समस्या पर हिंदी सिनेमा में बहुत कम बात हुई है। फिल्म वुडी ऐलन की साइकोलॉजिकल थ्रिलर ‘मैच पॉइंट’ (2005) से प्ररित है। डायरेक्टर शकुन बत्रा ने फिल्म में इंटीमेसी न सिर्फ दिखाई है। बल्कि इसे पर्दे पर रखा है। जिसमें फिजिकल लव और इमोशनस के बीच होने वाली जिंदगी की सच्चाई पर समाज का क्या रवैया रहता है।
फिर एकबार दीपिका पादुकोण ने पर्दे पर अपनी छाप छोड़ी है। वैसे सिद्धांत और दीपिका की परफॉर्मेंस काबिल-ए-तारीफ है।दोनों ने एक ऐसे किरदार को निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। फिल्म की कहानी के हिसाब से इससे बेहतर कास्टिंग नहीं हो सकती थी।
फिल्म में कुछ ऐसा भी है जो खलता है। एक तो इसकी लंबाई, जो 2 घंटे और 28 मिनट है जो आपको आपकों खींची हुई लगती है फिर भी फिल्म ‘गहराइयां’ दर्शकों निराश नहीं करेगी।
