vasant panchmi
वसंत पंचमी प्रत्येक वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष के पांचवें दिन मनाई जाती है। यह माँ देवी सरस्वती को समर्पित है जिसे ज्ञान, संगीत और सभी कलाओं व भाषा की देवी माना जाता है। वसंत पंचमी को भक्त पीले वस्त्र, फूल, गुलाल, जल प्रसाद, दीपक व रंगोली आदि से माँ देवी की पूजा करते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, पीले रंग की मिठाई व पीले मीठे चावल, तथा पीले रंग का हलवा देवी माँ को चढ़ाया जाता है।

फिर प्रसाद के रूप में उसका सेवन करते हैं। सरस्वती पूजा भारत के पूर्वी क्षेत्र के राज्यों बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम में भव्य पंडाल बनाकर माँ सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। अधिकांश विद्यालय, कॉलेज, शैक्षणिक संस्थान व विश्वविद्यालय इसे छुट्टी के साथ मनाते हैं। और कुछ संस्थान अपने ही परिसर में अपने छात्रों के लिए विशेष सरस्वती पूजा का आयोजन करते हैं।
वसंत पंचमी कथा
लोक कथा के अनुसार ऐसी मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। पौराणिक कथानुसार एक बार सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी धरती पर विचरण करने निकले उन्होंने सभी मनुष्य और जीव-जंतुओं को देखा वे सभी बहुत शांत दिखाई दिए। यह देखकर ब्रह्मा जी को पृथ्वी लोक पर कुछ कमी लगी। तब उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर पृथ्वी पर छिड़क दिया। जिसके उपरांत चार भुजाओं वाली एक सुंदर देवी प्रकट हुई। जिसके हाथ में एक वीणा एक माला और पुस्तक के साथ वर मुद्रा थी जिन्हें ज्ञान की देवी मां सरस्वती के नाम से पुकारा गया सरस्वती जी ने वीणा के तार से जो संगीत बजाया जिसकी तरंग से वातावरण में चारों ओर खुशाली फैल गई। पृथ्वी पर सभी प्राणी बोलने लगे झरने नदियां कल कल बहने लगी। इस प्रकार संगीत ने सन्नाटे समाप्त कर दिया। यह सब मां सरस्वती के आशीर्वाद से होने लगा तभी से मां सरस्वती को बुद्धि व संगीत की देवी कहा जाने लगा।
माँ सरस्वती मंत्र MAA SARASWATI MANTRA
• ॐ श्री सरस्वतीै नमः
• ॐ ऐं कलीम सौः श्री महासरस्वत्यै नमः
• ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं ॐ सरस्वतीै नमः
• ॐ ऐं सरस्वतीै नमः

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