
एक दिन फुरसत में बैठे थे कि आत्मसम्मान और स्वाभिमान मे॔ बहस छिड़ गई दोनों में कौन बड़ा है?

स्वाभिमान बोला मैं तुमसे बहुत बड़ा हूं क्योंकि मुझे अपने आप पर गर्व है मैं शिक्षित हूं,योग्य हूं सबलोग मेरा सम्मान करते हैं,सिर झुकाते हैं, कोई मेरे सामने बोलने की हिम्मत नहीं करता और काफी कुछ अपने बारे में बताता रहा।
आत्मसम्मान चुपचाप शांतिपूर्वक सब सुनता रहा और मन ही मन चिंतन करता रहा कि जिसे ये स्वाभिमान बोल रहा है वह तो शुद्ध अभिमान है।
लोग इसी गलत फहमी के शिकार हैं ।
इसलिए समाज में अनावश्यक द्वंद्व है,क्लेश है।
अभिमान कभी किसी का बरकरार नहीं रहता उसका एकदिन उसका पतन तो निश्चित है।
कौन समझाये ऐसे लोगों को ?
इसलिए थककर आत्म सम्मान ने चुप रहना ही बेहतर समझा।
